Thursday, May 13, 2010

स्नेह

घर
बहुत दिन बाद आया बेटा
मां
उसे सीने से लगा लेती है
पूछती
है कैसे रहे ?
कोई
तकलीफ तो नहीं ?
बेटा
नहीं कह कर
मां
के आंचल में छुप जाता है
ठीक
वैसे ही जब बचपन में
मां
की डांट से बचने के लिए
छुपा
करता था....
मां
का ममतामयी आंचल
आज
भींग गया है आंसुओं से
आंचल
में छुपा बेटा
रोक
नहीं पाता अपने को
और
बह पड़ती है
गंगा
जमुनी धारा
नेत्र
के दोनो कूलों से
एक
दूसरे का कर रहे
जलाभिषेक
आंसुओं
से.......
कोई
एक दूसरे को
छोड़ना
नहीं चाहता
बहुत
दिनों के अकेले का दर्द
आज
सामूहिक हो गया है
कौन
हटाये उन्हें कैसे हटें वे
दोनो
की आंखें लाल
पर
आंसू रुकना ही नहीं चाहते
उन्हे
तो बहुत दिनों के बाद
स्नेह
का स्वाद मिला है
बेटा
झट मां के चरण छूता है
मां
उसके माथे को चूमती है...
बेटे
के माथे पर कटे निशान को
याद
कर फिर रो लेती है...
जब
उसके बेटे को लगी थी
कैंची
साइकिल चलाते समय गिरकर चोट
बेटा
मां की फटी साड़ी से
झांकते
बालों को छिपाता है...
पर
अपने आंसू नहीं छिपा पाता
दोनो
की यादें आज हरी हो गई हैं
पा
रहीं हैं पानी दोनो के आंसुओं का
अब
कौन किससे कहे
कौन
किसकी सुने
दोनो
मौन ...नि:शब्द...
बेटे
को अभी मां के लिए
लाई
साड़ी निकालनी है
तो
मां को बेटे के लिए
बूढ़ी
आंखों से बुने ऊनी दस्ताने....
बेटे
को अभी पूछना है
नंदिनी
गाय ने अबकी बाछा दी या बाछी
संवरु
कुत्ता कहां ....?
आज
चौराहे पर नहीं मिला .....
मां
को भी बताना है
मंगरु
के बेटी लाली का गौना हो गया
और
वो चली गई
और
पड़ोस के राय साहब आये थे
कुंडली ,फोटो दे गये हैं...................
......................

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