Thursday, May 13, 2010

माँ उपमा नहीं .....

मां
उपमा नहीं होती
मां ...
हिमालय
से भी
ऊंची
होती है..............
और
धरती से भी बड़ी
लेकिन
पाषाण की तरह
कठोर नहीं होती...
सागर
से भी गहरी होती है
मां
लेकिन
सागर जैसी
खारी नहीं
भगवान
को भी
जन्म
देती है
मां
लेकिन
भगवान की तरह
दुर्लभ
नही होती...
मां
तो वायु से भी ज्यादे
गतिशील
है....
पर
अदृश्य बिल्कुल नहीं
दिखती
रहती है हरदम
हम
सब के बीमार होने पर
गुमसुम
बैठी सिरहाने
माथे
पर हाथ फेरते.....
लम्बी
उम्र की कामना करते ....
यह
शाश्वत सत्य है...
मां
उपमा नहीं हो सकती
क्योंकि
कोई नहीं है
मां
के समान
किससे
करें हम
तुलना
उसकी............
मां
...मां ...होती है
सिर्फ
मां ....
मां
उपमा
नहीं होती
.........................................
मृत्युंजय साधक
9891375604

No comments:

Post a Comment