Thursday, May 13, 2010

अनमोल रहा हूँ ....

हैदिल की बात तुझसे मगर खोल रहा हूँ
मैंचुप्पियों में आज बहुत बोल रहा हूँ
सांसोंमें मुझे तुझसे जो एक रोज मिली
थी वोखुश्बूयें हवाओं में अब घोल रहा हूँ
अबतेरी हिचकियों ने भी ये बात कही है
मैंतेरी याद साथ लिये डोल रहा हूँ
सोनेकी और न चांदी की मैं बात करुंगा
मैंदिल की ही तराजू पे दिल तोल रहा
हूँ चाहोतो मुहब्बत से मुझे मुफ्त ही ले लो
वैसेतो शुरु से ही मैं अनमोल रहा हूँ

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